चाणक्य नीति : पांचवा अध्याय

1. सोने की परख उसे घिस कर, काट कर, गरम कर के और पीट कर की जाती है. उसी तरह व्यक्ति का परीक्षण वह कितना त्याग करता है, उसका आचरण कैसा है, उसमे गुण कौनसे है और उसका व्यवहार कैसा है इससे होता है. 2. यदि आप पर मुसीबत आती नहीं है तो उससे सावधान रहे. लेकिन यदि मुसीबत आ जाती है तो किसी भी तरह उससे छुटकारा पाए. 3. एक ही गर्भ से पैदा क्यों न हुए हो, वे एक...

Read More

महात्मा जी की बिल्ली

एक बार एक महात्माजी अपने कुछ शिष्यों के साथ जंगल में आश्रम बनाकर रहते थें, एक दिन कहीं से एक बिल्ली का बच्चा रास्ता भटककर आश्रम में आ गया । महात्माजी ने उस भूखे प्यासे बिल्ली के बच्चे को दूध-रोटी खिलाया । वह बच्चा वहीं आश्रम में रहकर पलने लगा। लेकिन उसके आने के बाद महात्माजी को एक समस्या उत्पन्न हो गयी कि जब वे सायं ध्यान में बैठते तो वह बच्चा कभी...

Read More

क्‍यों अपनी ही पुत्री की ओर आकर्षित हुए ब्रह्मा?

हमारे देश का सबसे बड़ा कमजोरी ये है की देश लोगों की आस्था से बंटी हुई है. देश का इतिहासकार, लेखक और तरह तरह की मेडिया हम को सदियों झूठ बोला, पीढ़ी दर पीढ़ियों को उनके आस्था के ऊपर झूठ बोलागया और इक दूसरे से नफ़रत फैलाया गया. हमारा ये भूखंड क्यों आस्थाओं के आधार पर विभाजित हुआ है हम को कभी नहीं बताया गया. ये इस बात का सूचक है की, कुछ लोग खुद की आस्था...

Read More

शहरयार और शाहजमाँ की कहानी – अलिफ़ लैला

फारस देश भी हिंदुस्तान और चीन के समान था और कई नरेश उसके अधीन थे। वहाँ का राजा महाप्रतापी और बड़ा तेजस्वी था और न्यायप्रिय होने के कारण प्रजा को प्रिय था। उस बादशाह के दो बेटे थे जिनमें बड़े लड़के का नाम शहरयार और छोटे लड़के का नाम शाहजमाँ था। दोनों राजकुमार गुणवान, वीर धीर और शीलवान थे। जब बादशाह का देहांत हुआ तो शहजादा शहरयार गद्दी पर बैठा और...

Read More

किसान की घड़ी

एक बार एक किसान की घड़ी कहीं खो गयी. वैसे तो घडी कीमती नहीं थी पर किसान उससे भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ था और किसी भी तरह उसे वापस पाना चाहता था. उसने खुद भी घडी खोजने का बहुत प्रयास किया, कभी कमरे में खोजता तो कभी बाड़े तो कभी अनाज के ढेर में ….पर तामाम कोशिशों के बाद भी घड़ी नहीं मिली. उसने निश्चय किया की वो इस काम में बच्चों की मदद लेगा और उसने...

Read More

बत्तीसवीं पुतली ~ रानी रूपवती ~ अंतिम कहानी

बत्तीसवीं पुतली रानी रूपवती ने राजा भोज को सिंहासन पर बैठने की कोई रुचि नहीं दिखाते देखा तो उसे अचरज हुआ। उसने जानना चाहा कि राजा भोज में आज पहले वाली व्यग्रता क्यों नहीं है। राजा भोज ने कहा कि राजा विक्रमादित्य के देवताओं वाले गुणों की कथाएँ सुनकर उन्हें ऐसा लगा कि इतनी विशेषताएँ एक मनुष्य में असम्भव हैं और मानते हैं कि उनमें बहुत सारी कमियाँ है।...

Read More

एक रोटी

तीन व्यक्ति एक सिद्ध गुरु से दीक्षा प्राप्त कर वापस लौट रहे थे . गुरु जी ने उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान के साथ – साथ व्यवहारिक होने की भी सीख दी थी . तीनो तमाम ग्रंथो , पुराणों पर चर्चा करते आगे बढ़ते जा रहे थे . बहुत समय चलने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि अब उन्हें कहीं विश्राम करना चाहिए और रात गुजार कर ही आगे बढ़ना चाहिए। वे एक जगह रुके और खाने की...

Read More

प्रेरणा का स्रोत

दोस्तों ,जिंदगी है तो संघर्ष हैं,तनाव है,काम का दबाव है, ख़ुशी है,डर है !लेकिन अच्छी बात यह है कि ये सभी स्थायी नहीं हैं!समय रूपी नदी के प्रवाह में से सब प्रवाहमान हैं!कोई भी परिस्थिति चाहे ख़ुशी की हो या ग़म की, कभी स्थाई नहीं होती ,समय के अविरल प्रवाह में विलीन हो जाती है! प्रेरणा का स्रोत ऐसा अधिकतर होता है की जीवन की यात्रा के दौरान हम अपने आप...

Read More

बगदाद के व्यापारी अली ख्वाजा की कहानी – अलिफ लैला

खलीफा हारूँ रशीद के राज्य काल में बगदाद में अलीख्वाजा नामक एक छोटा व्यापारी रहता था। वह अपने पुश्तैनी मकान में, जो छोटा-सा ही था, अकेला रहता था। उसने विवाह नहीं किया था और उसके माता पिता की भी मृत्यु हो गई थी। उसका बहुत छोटा व्यापार था और सिर्फ दो-चार आदमी ही उसे जानते थे। उनमें उसका एक सौदागर घनिष्ट मित्र था। उक्त व्यापारी ने लगातार तीन रातों तक...

Read More

मज़दूरी की व्यवस्था का नाश हो – कार्ल मार्क्स

अपनी श्रम-शक्ति बेच कर-और वर्तमान व्यवस्था में उसे यह बेचनी ही पड़ती है-मज़दूर अपनी श्रम-शक्ति पूँजीपति को इस्तेमाल करने के लिए सौंप देता है,-पर कुछ तर्कसंगत सीमाओं के भीतर। मज़दूर अपनी श्रम-शक्ति को क़ायम रखने के लिए उसे बेचता है, नष्ट करने के लिए नहीं,-हाँ, इस्तेमाल के दौरान में वह भले ही थोड़ी घिस जाये, या कम हो जाये। यह भी पहले से मान लिया जाता है...

Read More

स्टीव जॉब्स के अनमोल विचार

Quote 1: Innovation distinguishes between a leader and a follower. In Hindi: नयी खोज एक लीडर और एक अनुयायी के बीच अंतर करती है. Quote 2: Your time is limited, so don’t waste it living someone else’s life. Don’t be trapped by dogma – which is living with the results of other people’s thinking. Don’t let the noise of other’s opinions drown out your...

Read More

मछुवारे की कहानी – अलिफ लैला

शहरजाद ने कहा कि हे स्वामी, एक वृद्ध और धार्मिक प्रवृत्ति का मुसलमान मछुवारा मेहनत करके अपने स्त्री-बच्चों का पेट पालता था। वह नियमित रूप से प्रतिदिन सवेरे ही उठकर नदी के किनारे जाता और चार बार नदी में जाल फेंकता था। एक दिन सवेरे उठकर उसने नदी में जाल डाला। उसे निकालने लगा तो जाल बहुत भारी लगा। उसने समझा कि आज कोई बड़ी भारी मछली हाथ आई है लेकिन...

Read More

राजा के शिक्षा

बहुत समय पहले की बात है, सुदूर दक्षिण में किसी प्रतापी राजा का राज्य था  । राजा के तीन पुत्र थे, एक दिन राजा के मन में आया कि पुत्रों को को कुछ ऐसी शिक्षा दी जाये कि समय आने पर वो राज-काज सम्भाल सकें । इसी विचार के साथ राजा ने सभी पुत्रों को दरबार में बुलाया और बोला, “ पुत्रों, हमारे राज्य में नाशपाती का कोई वृक्ष नहीं है, मैं चाहता हूँ तुम सब चार...

Read More

बावेरु द्वीप -जातक कथा

जब वाराणसी के कुछ व्यापारी बावेरु द्वीप पहुँचे तो वे अपने साथ एक कौवा भी ले गये। उस देश के लोगों ने कभी भी किसी कौवे को नहीं देखा था। इसलिए उन्होंने मुँह माँगा दाम दे उस कौवे को खरीद लिया। कौवे की तब अच्छी आवभगत हुई। उसे सोने के पिंजरे में रखा गया और नाना प्रकार के फल व मांस से उसका सत्कार किया गया। दर्शनार्थी उसे देख कहते, ” वाह इस पक्षी की...

Read More

मेत्रेयः भावी बुद्ध -जातक कथा

पालि परम्परा में मेत्रेय भावी बुद्ध के रुप में जाने जाते हैं। (संस्कृत ग्रंथों में इनका नाम मैत्रेय है) परम्परा में यह मान्य है कि इनका जन्म तब होगा जब मनुष्यों का औसतन जीवन-काल चौरासी हज़ार वर्षों का होगा। मेत्रेय का जन्म एक प्रसिद्ध विद्वत्-कुल में अजित के नाम से केतुमती नामक एक स्थान में होगा। इनके पिता का नाम सुब्रह्मण तथा माता का नाम...

Read More

दृष्टिकोण

एक बार दो भाई, रोहित और मोहित थे। वे 9 वीं कक्षा के छात्र थे और एक ही स्कूल में पढ़ते थे। उनकी ही कक्षा में अमित नाम का भी एक छात्र था जो बहुत अमीर परीवार से था। एक दिन अमित अपने जन्मदिन पर बहुत महंगी घड़ी पहन कर स्कूल आया, सभी उसे देख कर बहुत चकित थे। हर कोई उस घड़ी के बारे में बातें कर रहा था ,कि तभी किसी ने अमित से पुछा , “यार , ये घड़ी कहाँ से ली ...

Read More

पौराणिक कथाएँ

पौराणिक कथाएँ हिन्दू धर्म एक ऐसा महान धर्म है जिसमें कई महाकाव्य और धार्मिक कथाओं का वर्णन है। कई सारे ग्रंथ इस बात की गवाही देते हैं की विभिन्न युगों में दैवी शक्तियों नें अवतार ले कर पृथ्वी को पाप मुक्त किया है। और उन्हीं पौराणिक ग्रंथों में सिद्ध ऋषि मुनियों और दैवी पात्रों के द्वारा, दूसरे कई पात्रों को दिये गए शाप का भी वर्णन किया गया है।  1...

Read More

व्यवहार के बारे में – माओ त्से–तुङ, जुलाई 1937

यह दार्शनिक निबंध कामरेड माओ त्से–तुङ ने “व्यवहार के बारे में” शीर्षक अपने निबंध के बाद लिखा था, और उक्त निबंध के ही समान इस निबंध का उद्देश्य भी उन गंभीर कठमुल्लावादी विचारों को दूर करना था जो उस समय पार्टी में मौजूद थे। यह सबसे पहले येनान में जापान–विरोधी सैनिक व राजनीतिक कालेज में भाषण के रूप में प्रस्तुत किया गया था। संकलित रचनाओं में शामिल...

Read More

खटमल और बेचारी जूं ~ पंचतंत्र

एक राजा के शयनकक्ष में मंदरीसर्पिणी नाम की जूं ने डेरा डाल रखा था। रोज रात को जब राजा जाता तो वह चुपके से बाहर निकलती और राजा का खून चूसकर फिर अपने स्थान पर जा छिपती। संयोग से एक दिन अग्निमुख नाम का एक खटमल भी राजा के शयनकक्ष में आ पहुंचा । जूं ने जब उसे देखा तो वहां से चले जाने को कहा । उसने अपने अधिकार-क्षेत्र में किसी अन्य का दखल सहन नहीं था ।...

Read More

जानवरों की भाषा जानने वाला राजा -जातक कथा

एक बार कुछ बच्चे एक नाग को मार रहे थे। एक राजा ने उसकी रक्षा की। राजा पर प्रसन्न हो नाग ने उस राजा को जानवरों की भाषा समझने और बोलने का वर प्रदान किया था । किन्तु उसे यह चेतावनी भी दी थी कि यदि वह उस बात की चर्चा यदि कभी भी किसी से करेगा तो उसके प्राण चले जाएंगे। एक दिन राजकीय काम-काज के बाद राजा जब अपनी प्रिय रानी के साथ एक बाग में बैठा कुछ खा पी...

Read More

किसी भी विज्ञापन को विश्वास करने से पहले जांच करें ।

loading...

क्रमरहित सूची

Recent Posts

ज्ञान, आजाद है; और किसी को भी बिना किसी प्रतिबंध के ज्ञान का आनंद लेने का अधिकार है. इस में प्रकाशित कोई भी कहानी या लेख को आप बिना प्रतिबन्ध के उपयोग कर सकते हो. आप अपने ब्लॉग में यहाँ से कॉपी करके पेस्ट कर सकते हो लेकिन कोई भी फेब्रिकेशन या फाल्सीफिकेशन की जिम्मेदारी आप की होगी. वेबसाइट का सिद्धांत नैतिक ज्ञान फैलाना है, ना कि ज्ञान पर हक़ जताना. ज्ञान की स्वतंत्रता वेबसाइट का आदर्श है; आप जितना चाहते हैं उतना उसकी प्रतिलिपि(Copy) बनाकर बिना प्रतिबन्ध के ज्यादा से ज्यादा लोगों तक फैला सकते हो.