एंक गांव में सुबह एक यात्री आया उसने अपने घोडे को रोका , गांव के दरवाजे पर बैठे हुए एक बुढे आदमी से उसने पुछा- इस गांव के लोग कैंसे है ? मैं इस गांव में ठहरना चाहता हूं, इसी गांव में निवास करना चाहता हूं। उस बुढे आदमी ने कहा- मेरे मित्र पहले मेैं तुमसे यह पुछूंगा कि तुम जिस गांव को छोडकर आ रहे हो उस गांव के लोग कैंसे थे ? उसने कहा उस गांव के लोगों...
आपने बीरबल के बहुत से किस्से पड़े होंगे, लेकिन एक भी किस्सा ऐसा नही पड़ा होगा जिसमे बीरबल ने कभी मात खाई हो. क्योंकि बीरबल से चतुर और चालक व्यक्तित्व शायद ही कभी हुआ हो. बीरबल की बदसूरती पर राज्य सभा के सभी मंत्री मजाक बना रहे थे तभी चतुर बीरबल कुछ ऐसा कहते है, जिसे सुनकर सभी दरबारी अपना सर शर्म से निचे कर के बैठ जाते हैं. चलिए आगे पूरी कहानी पड़ते...
एक दिन स्कूल में छुट्टी की घोषणा होने के कारण, एक दर्जी का बेटा, अपने पापा की दुकान पर चला गया ।वहाँ जाकर वह बड़े ध्यान से अपने पापा को काम करते हुए देखने लगा । उसने देखा कि उसके पापा कैंची से कपड़े को काटते हैं और कैंची को पैर के पास टांग से दबा कर रख देते हैं । फिर सुई से उसको सीते हैं और सीने के बाद सु ई को अपनी टोपी पर लगा लेते हैं । जब उसने...
चन्द्रशेखर नगर में रत्नदत्त नाम का एक सेठ रहता था। उसके एक लड़की थी। उसका नाम था उन्मादिनी। जब वह बड़ी हुई तो रत्नदत्त ने राजा के पास जाकर कहा कि आप चाहें तो उससे ब्याह कर लीजिए। राजा ने तीन दासियों को लड़की को देख आने को कहा। उन्होंने उन्मादिनी को देखा तो उसके रुप पर मुग्ध हो गयीं, लेकिन उन्होंने यह सोचकर कि राजा उसके वश में हो जायेगा, आकर कह...
मित्रो, पहली यात्रा में मुझ पर जो विपत्तियाँ पड़ी थीं उनके कारण मैंने निश्चय कर लिया था कि अब व्यापार यात्रा न करूँगा और अपने नगर में सुख से रहूँगा। किंतु निष्क्रियता मुझे खलने लगी, यहाँ तक कि मैं बेचैन हो गया और फिर इरादा किया कि नई यात्रा करूँ और नए देशों और नदियों, पहाड़ों आदि को देखूँ। अतएव मैंने भाँति-भाँति की व्यापारिक वस्तुएँ मोल लीं और...
हम साधारण मनुष्य अक्सर किसी से नाराज़ हो जाते हैं या किसी को भला-बुरा कह देते हैं, पर संतो का स्वाभाव इसके विपरीत हमेशा सौम्य व् मधुर बना रहता है। संत तुकाराम का स्वभाव भी कुछ ऐसा ही था, वे न कभी किसी पर क्रोध करते और न किसी को भला-बुरा कहते। आइये इस कहानी के माध्यम से जानते हैं कि आखिर संत तुकाराम के इस अच्छे व्यवहार का रहस्य क्या था। एक बार की...
एक बार मुल्ला नसरुदीन को प्रवचन देने के लिए आमंत्रित किया गया . मुल्ला समय से पहुंचे और स्टेज पर चढ़ गए , “ क्या आप जानते हैं मैं क्या बताने वाला हूँ ? मुल्ला ने पूछा . “नहीं ” बैठे हुए लोगों ने जवाब दिया . यह सुन मुल्ला नाराज़ हो गए ,” जिन लोगों को ये भी नहीं पता कि मैं क्या बोलने वाला हूँ मेरी उनके सामने बोलने की कोई इच्छा नहीं है . “ और ऐसा कह...
किसी ग्राम में किसान दम्पती रहा करते थे। किसान तो वृद्ध था पर उसकी पत्नी युवती थी। अपने पति से संतुष्ट न रहने के कारण किसान की पत्नी सदा पर-पुरुष की टोह में रहती थी, इस कारण एक क्षण भी घर में नहीं ठहरती थी। एक दिन किसी ठग ने उसको घर से निकलते हुए देख लिया। उसने उसका पीछा किया और जब देखा कि वह एकान्त में पहुँच गई तो उसके सम्मुख जाकर उसने कहा...
आपने बीरबल के बहुत से किस्से पड़े होंगे, लेकिन एक भी किस्सा ऐसा नही पड़ा होगा जिसमे बीरबल ने कभी मात खाई हो. क्योंकि बीरबल से चतुर और चालक व्यक्तित्व शायद ही कभी हुआ हो. बीरबल की बदसूरती पर राज्य सभा के सभी मंत्री मजाक बना रहे थे तभी चतुर बीरबल कुछ ऐसा कहते है, जिसे सुनकर सभी दरबारी अपना सर शर्म से निचे कर के बैठ जाते हैं. चलिए आगे पूरी कहानी पड़ते...
एक बार अकबर भरे दरबार में बैठे थे। अकबर के मन में अचानक एक विचार आया और उन्होंने सभी दरबारीयों से एक सवाल पूछा- क्या आप बता सकते हैं कि मेरी हथेलियों पर बाल क्यों नहीं है ? जहांपनाह हथेलीयों पर बाल होते ही नहीं है. सभी दरबारीयों ने एक स्वर में कहा और गर्व से फूल गये कि उन्होंने बादशाह के सवाल का तुरन्त जवाब दिया मगर अकबर बादशाह को इस सीधे सादे...
पालि-परम्परा में ककुसन्ध बाईसवें बुद्ध हैं । ये खेमा वन में जन्मे थे। इनकी माता का नाम विशाखा था। इनकी पत्नी का नाम विरोचमना और पुत्र का नाम उत्तर था। शिरीष-वृक्ष के नीचे इन्हें ज्ञान-प्राप्ति हुई और अपना प्रथम उपदेश इन्होंने मकिला के निकट एक उद्यान में, चौरासी हज़ार भिक्षुओं को दिया। भिक्षुओं में विधुर एवं संजीव इनके पट्टशिष्य थे और भिक्षुणियों...
तीसवीं पुतली – जयलक्ष्मी ने जो कथा कही वह इस प्रकार है- राजा विक्रमादित्य जितने बड़े राजा थे उतने ही बड़े तपस्वी। उन्होंने अपने तप से जान लिया कि वे अब अधिक से अधिक छ: महीने जी सकते हैं। अपनी मृत्यु को आसन्न समझकर उन्होंने वन में एक कुटिया बनवा ली तथा राज-काज से बचा हुआ समय साधना में बिताने लगे। एक दिन राजमहल से कुटिया की तरफ आ रहे थे कि उनकी...
दुनियाजाद ने मलिका शहरजाद से नई कहानी सुनाने को कहा और बादशाह शहरजाद ने भी अपनी मौन स्वीकृति दे दी तो शहरजाद ने नई कहानी शुरू कर दी। उसने कहा कि पुराने जमाने में दमिश्क नगर में एक व्यापारी रहता था जिसका नाम अय्यूब था। उसके दो ही संतानें थीं, एक पुत्र और एक पुत्री। पुत्र का नाम था गनीम और पुत्री का अलकिंत। पुत्री अत्यंत रूपवती और गुणवंती थी और उसे...
किसी नगर में मांडलिक नाम का राजा राज करता था। उसकी पत्नी का नाम चडवती था। वह मालव देश के राजा की लड़की थी। उसके लावण्यवती नाम की एक कन्या थी। जब वह विवाह के योग्य हुई तो राजा के भाई-बन्धुओं ने उसका राज्य छीन लिया और उसे देश-निकाला दे दिया। राजा रानी और कन्या को साथ लेकर मालव देश को चल दिया। रात को वे एक वन में ठहरे। पहले दिन चलकर भीलों की नगरी में...
चार साल से किशनगढ़ गाँव में बारिश की एक बूँद तक नहीं गिरी थी। सभी बड़े परेशान थे। हरिया भी अपने बीवी-बच्चों के साथ जैसे-तैसे समय काट रहा था। एक दिन बहुत परेशान होकर वह बोला, “अरे ओ मुन्नी की माँ, जरा बच्चों को लेकर पूजा घर में तो आओ…” बच्चों की माँ ६ साल की मुन्नी और चार साल के राजू को लेकर पूजा घर में पहुंची। हरिया हाथ जोड़ कर भगवान् के सामने बैठा...
राहुल एक समझदार लड़का था, लेकिन वह पढाई के मामले में हमेशा मेहनत करने से बचता था। एक बार जब उसका पसंदीदा कप टूट गया तो माँ ने उसे बाज़ार से खुद जाकर एक अच्छा कप लाने को कहा। पहली बार राहुल को इस तरह का कोई काम मिला था, वह मन ही मन खुश हो रहा था कि चलो इसी बहाने उसे बाहर जाने को मिलेगा और उतनी देर कोई पढने के लिए नहीं कहेगा। वह पास के बाजार में...
एक हिन्दू सन्यासी अपने शिष्यों के साथ गंगा नदी के तट पर नहाने पहुंचा. वहां एक ही परिवार के कुछ लोग अचानक आपस में बात करते-करते एक दूसरे पर क्रोधित हो उठे और जोर-जोर से चिल्लाने लगे . संयासी यह देख तुरंत पलटा और अपने शिष्यों से पुछा ; ” क्रोध में लोग एक दूसरे पर चिल्लाते क्यों हैं ?’ शिष्य कुछ देर सोचते रहे, एक ने उत्तर दिया, ” क्योंकि हम क्रोध में...
अनाज का व्यापारी बोला कि कल मैं एक धनी व्यक्ति की पुत्री के विवाह में गया था। नगर के बहुत-से प्रतिष्ठित व्यक्ति उसमें शामिल थे। शादी की रस्में पूरी होने पर दावत हुई और नाना प्रकार के व्यंजन परोसे गए। एक थाल में एक मसालेदार स्वादिष्ट लहसुन का व्यंजन रखा था जिन्हें उठा-उठा कर हर आदमी रुचिपूर्वक खा रहा था। किंतु एक आदमी उसे नहीं खाता था। पूछने पर उस...
हिमालय के किसी सरोवर में कभी एक दानव केकड़ा निवास करता था। हाथी उसका सबसे प्रिय आहार था। जब भी हाथी के झुण्ड उस सरोवर में पानी पीने अथवा जल-क्रीड़ा के लिए आते तो उनमें से एक को वह अपना आहार अवश्य बनाता। चूँकि हाथी समूह के लिए उस वन में जल का कोई अन्य स्रोत नहीं था। अत: गजराज ने अपनी गर्भिणी हथिनी को दूर किसी प्रदेश में भेज दिया कि कहीं गलती से हथिनी...
नियोग और हिन्दू धर्म (देवर, जेठ, ससुर, ताऊ, चाचा, मामा सबके संग संभोग) नियोग का अर्थ वेदादि शास्त्रों में पति द्वारा संतान उत्पन्न न होने पर या पति की अकाल मृत्यु की अवस्था में ऐसा नियमबद्ध उपाय है जिसके अनुसार स्त्री अपने देवर, जेठ, ससुर, ताऊ, चाचा, मामा सबके संग संभोग अथवा सम्गोत्री से गर्भाधान करा सकती है । यदि पति जीवित है तो वह व्यक्ति स्त्री...